सीआरसी सिक्किम ने 3 और 4 जुलाई 2025 को भारतीय सांकेतिक भाषा पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।
**दिव्यांगजनों के कौशल विकास, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण हेतु समग्र क्षेत्रीय केंद्र की प्रेस विज्ञप्ति**
**गंगटोक, 05 जुलाई:**
दिव्यांगजनों के कौशल विकास, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण हेतु समग्र क्षेत्रीय केंद्र (कॉम्पोज़िट रीजनल सेंटर – CRC), जो कि राष्ट्रीय लोकोमोटर विकलांगता संस्थान (NILD), कोलकाता के प्रशासनिक नियंत्रण में, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MSJE), भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत है, द्वारा 3 एवं 4 जुलाई 2025 को भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language) पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग (WCSDWD) के सम्मेलन कक्ष, लुम्से, 5वां मील, सिक्किम में आयोजित हुआ।
यह कार्यक्रम DEPwD की जन-जागरूकता योजना एवं प्रचार योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया।
3 जुलाई को आयोजित उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की सचिव सुश्री नॉरमिट लेप्चा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
प्रशिक्षण के संसाधन व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन्स) थे:
1. श्री अखिलेश चौहान, मास्टर ट्रेनर, DISLI कोर्स, CRC सिक्किम
2. श्री विशाल बिस्वकर्मा, भारतीय सांकेतिक भाषा दुभाषिया, DISLI कोर्स, CRC सिक्किम
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों की व्यवस्था WCSDWD द्वारा की गई थी।
सुश्री नॉरमिट लेप्चा, सचिव WCSDWD ने बधिर समुदाय के लिए सांकेतिक भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु इसका प्रचार-प्रसार सभी के लिए आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं तथा स्वयं भी इसे सीखने की इच्छा व्यक्त की।
सुश्री पुष्पांजलि गुप्ता, निदेशक, CRC सिक्किम ने NILD कोलकाता के निदेशक डॉ. ललित नारायण का धन्यवाद किया, जिनकी अनुमति एवं मार्गदर्शन से CRC सिक्किम राज्य में सुचारु रूप से कार्य कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में केंद्र मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को लागू करने में सक्षम हुआ है, जिसका उद्देश्य राज्य में सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देना एवं प्रचारित करना है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल दिव्यांगजन ही नहीं, बल्कि गैर-दिव्यांग व्यक्तियों को भी आगे आकर सांकेतिक भाषा सीखनी चाहिए, क्योंकि निकट भविष्य में इसे विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाने वाला है।
CRC सिक्किम के दुभाषिया श्री विशाल बिस्वकर्मा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज विशाल एक अत्यंत मांग वाले पेशेवर बन चुके हैं और उन्हें अधिकांश कार्यक्रमों में दुभाषिया के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा सीखना न केवल व्यक्ति को कुशल बनाता है, बल्कि कार्य की गरिमा से जुड़ा होने के कारण उसे एक सम्मानित पेशेवर भी बनाता है।
समापन समारोह में प्रतिभागियों की ओर से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। प्रतिभागी एक नए कौशल से परिचित होकर अभिभूत थे और इसे विद्यालय तथा विद्यालय के बाहर नियमित रूप से उपयोग में लाने के लिए उत्सुक दिखे। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि भारतीय सांकेतिक भाषा ने उनमें रचनात्मकता को पोषित किया और उसे उभरने का अवसर प्रदान किया।




